मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में पुलिस हिरासत में हुई मौतों के गंभीर आरोपों पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने कड़ा संज्ञान लिया है। कोर्ट ने इस मामले में दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। जस्टिस विवेक जैन और जस्टिस अजय कुमार निरंकारी की डिवीज़न बेंच ने राज्य सरकार के साथ-साथ पुलिस महानिदेशक, सागर रेंज के आईजी, छतरपुर के एसपी और राजनगर, चंदला व गौरीहार थानों के प्रभारियों को नोटिस थमाया है। इसके साथ ही कोर्ट ने संबंधित थानों के सीसीटीवी फुटेज को तुरंत सुरक्षित रखने के निर्देश दिए हैं।
 

चार मौतों पर सीबीआई जांच की मांग

खजुराहो के सामाजिक कार्यकर्ता पीयूष दीक्षित द्वारा दायर इस जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि पिछले कुछ महीनों के भीतर छतरपुर जिले के अलग-अलग थानों में पुलिस हिरासत के दौरान चार लोगों की जान जा चुकी है। याचिकाकर्ता का साफ कहना है कि ये मौतें पुलिस प्रताड़ना और टॉर्चर की वजह से हुई हैं। इस मामले की निष्पक्षता से जांच के लिए सीबीआई को केस सौंपने की मांग की गई है। साथ ही दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज करने और मृतकों के कॉल रिकॉर्ड खंगालने की भी गुहार लगाई गई है।

थाने जैसी सुरक्षित जगह पर जहर और फांसी का फंदा कहां से आया?'

सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की तरफ से पेश हुए डिप्टी एडवोकेट जनरल स्वप्निल गांगुली ने दलील दी कि याचिका में जिन मौतों का जिक्र है, उनमें से दो मामलों में पहले ही न्यायिक जांच के आदेश दिए जा चुके हैं। इस पर याचिकाकर्ता के वकील के.सी. घिल्डियाल ने अदालत में तीखा सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि पुलिस प्रशासन का दावा है कि आरोपियों ने थाने के अंदर फांसी लगाकर या जहर खाकर खुदकुशी की है।

सवाल यह उठता है कि पुलिस स्टेशन जैसी सुरक्षित जगह पर किसी आरोपी के पास जहर या फांसी लगाने का सामान आखिर आया कहां से? यह अपने आप में एक बड़ी जांच का विषय है। हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले की अगली सुनवाई 14 जुलाई तय की है।

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